डिजिटल ग्राम, सशक्त उत्तर प्रदेश बनाने की दिशा में ग्रामीण कनेक्टिविटी का हुआ विस्तार

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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज डिजिटल तकनीक विकास की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, व्यापार और सरकारी सेवाओं के क्षेत्र में इंटरनेट की उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए यह आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए। उत्तर प्रदेश सरकार इसी उद्देश्य के अनुरूप ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार करने, दूरसंचार अवसंरचना को मजबूत बनाने तथा इंटरनेट आधारित सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही हैं।
ग्राम पंचायतों तक इंटरनेट की पहुंच का विस्तार
उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा राज्य पूंजी निवेश वर्ष 2022-23 के अंतर्गत राज्यों को विशेष सहायता योजना के माध्यम से प्रदेश की 16,718 ग्राम पंचायतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इस कार्य में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की भूमिका महत्वपूर्ण है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच एफटीटीएच (फाइबर टू द होम) कनेक्शन तथा एक वाई-फाई कनेक्शन स्थापित किए जाने का प्रावधान है। इस पहल के अंतर्गत अब तक 8,600 ग्राम पंचायतों में कुल 29,320 एफटीटीएच कनेक्शन स्थापित किए जा चुके हैं। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट आधारित सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। फाइबर आधारित कनेक्टिविटी के माध्यम से विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायत कार्यालयों, स्थानीय उद्यमों तथा अन्य संस्थानों को इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी नागरिकों को सूचनाओं और सेवाओं तक पहुंच बनाने का अतिरिक्त माध्यम प्रदान करती है। ऑनलाइन आवेदन, प्रमाणपत्रों से संबंधित सेवाएं, डिजिटल भुगतान, शैक्षिक सामग्री और विभिन्न सरकारी पोर्टलों का उपयोग अधिक सुगम बनाने में इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका हो रही है।
एफटीटीएच और वाई-फाई से मजबूत होती डिजिटल आधारशिला
फाइबर टू द होम ऐसी तकनीक है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी सीधे घर या निर्धारित परिसर तक पहुंचाई जाती है। पारंपरिक नेटवर्क की तुलना में फाइबर आधारित तकनीक उच्च गति और अधिक डेटा क्षमता वाली सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम है। वहीं, वाई-फाई के माध्यम से उपलब्ध इंटरनेट कनेक्शन को एक निश्चित क्षेत्र में विभिन्न डिजिटल उपकरणों पर उपयोग किया जा सकता है। इन दोनों सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट के उपयोग को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में सहायक हो रहा है। इससे विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का उपयोग कर सकते हैं, शिक्षक डिजिटल शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच बना सकते हैं तथा छोटे कारोबारी अपने उत्पादों और सेवाओं की जानकारी व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में 4ळ सेवाओं के विस्तार पर जोर
इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ-साथ मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता भी डिजिटल समावेशन का महत्वपूर्ण पक्ष है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल सेवाओं की बेहतर पहुंच होने से नागरिकों को संचार, ऑनलाइन जानकारी और मोबाइल आधारित सेवाओं का उपयोग करने में सुविधा मिली है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण है, जहां फाइबर आधारित कनेक्टिविटी का उपयोग सीमित है या जहां नागरिक मुख्य रूप से स्मार्टफोन के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में चौथी पीढ़ी (4ळ) की मोबाइल सेवाओं के विस्तार के लिए बीएसएनएल को 434 ग्राम पंचायतों में प्रति ग्राम पंचायत 200 वर्गमीटर भूमि निःशुल्क आवंटित की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मोबाइल नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता को सुगम बनाया है। मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से ग्रामीण नागरिकों को ऑनलाइन संचार, डिजिटल भुगतान, सरकारी सूचनाओं तथा इंटरनेट आधारित सेवाओं का उपयोग करने के अधिक अवसर मिले हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए डिजिटल माध्यमों से जुड़ना अपेक्षाकृत आसान हो रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में डिजिटल संभावनाएं
ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी का प्रभाव केवल इंटरनेट उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट विद्यार्थियों को ऑनलाइन पाठ्य सामग्री, डिजिटल पुस्तकालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा अन्य शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच प्रदान कर रहा है। ग्रामीण विद्यार्थियों को अपने गांव में रहते हुए व्यापक शैक्षिक सामग्री का उपयोग करने का अवसर मिला है। विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक विविध और उपयोगी बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन परामर्श, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और डिजिटल अभिलेखों जैसी सुविधाओं का उपयोग संभव होता है। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए यह सुविधा प्रारंभिक चिकित्सकीय परामर्श तक पहुंच बनाने में सहायक हो रही है। कृषि के क्षेत्र में इंटरनेट किसानों को मौसम संबंधी जानकारी, कृषि तकनीकों, बाजार भाव, फसल प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने में मदद कर रहा है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग से किसान विभिन्न बाजारों और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर अपने निर्णयों को बेहतर ढंग से तैयार कर सकते हैं। ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों के लिए इंटरनेट डिजिटल कौशल सीखने, ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने, रोजगार के अवसर तलाशने तथा छोटे व्यवसायों को डिजिटल माध्यमों से आगे बढ़ाने का साधन बन सकता है।
सतत और समावेशी डिजिटल विकास की ओर
ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार में नेटवर्क की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और वास्तविक उपयोग भी महत्वपूर्ण हैं। दूरसंचार अवसंरचना का प्रभावी लाभ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि स्थापित कनेक्शनों का उपयोग बढ़े, नेटवर्क संबंधी समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो तथा ग्रामीण नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी मिले। इसके लिए प्रदेश सरकार गांव-गांव नेटवर्क पहुंचा रही है। उत्तर प्रदेश में 16,718 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने की पहल, 8,600 ग्राम पंचायतों में 29,320 एफटीटीएच कनेक्शनों की स्थापना, 434 ग्राम पंचायतों में 4ळ सेवाओं के विस्तार के लिए भूमि आवंटन और राइट ऑफ वे संबंधी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की व्यवस्था इस दिशा में कार्य किये गये हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी आज ग्रामीण विकास की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसका प्रभावी उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, उद्यमिता और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के ये प्रयास प्रदेश को तकनीक-सक्षम बनाने तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल अंतर को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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