राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय लखनऊ में ‘‘पंचगव्य एवं आयुर्वेद की मानव स्वास्थ में भूमिका एवं उपयोगिता’’ विषय पर आज एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया

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आयुष विभाग द्वारा लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय परिसर में शुक्रवार को ‘‘पंचगव्य एवं आयुर्वेद की मानव स्वास्थ में भूमिका एवं उपयोगिता’’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन आयुष मंत्री डॉ0 दया शंकर मिश्र दयालु जी के करकमलों द्वारा हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री जी एवं सभी अतिथियों द्वारा भगवान धन्वन्तरि जी के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। आयुष मंत्री जी ने मुख्य वक्ता श्री श्याम बिहारी गुप्त जी अध्यक्ष गौ सेवा आयोग उत्तर प्रदेश, एवं श्री सुनील मानसिंह का सदस्य राष्ट्रीय जंतु कल्याण बोर्ड एवं राष्ट्रीय पंचगव्य अनुसंधान परिषद के सदस्य को पुष्पगुच्छ अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार जी ने आयुष मंत्री जी का स्वागत किया। श्री जी.एस. प्रियदर्शी जी ने प्रमुख सचिव आयुष का स्वागत किया। प्राचार्य महोदया प्रो0 सुधा सिंह जी द्वारा आयुष महानिदेशक श्री जी.एस. प्रियदर्शी एवं विशेष सचिव आयुष श्री मदन सिंह गर्व्याल का स्वागत किया गया। निदेशक आयुर्वेद सेवाएं, निदेशक होम्योपैथी, निदेशक यूनानी का स्वागत प्राचार्य महोदया द्वारा किया गया।

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इस अवसर पर ‘चरक संहिता में पंचगव्य’, ‘द्रव्यगुण विज्ञान,’ एवं ‘सचित्र आयुर्वेदिय पदार्थ विज्ञान’ नामक तीन पुस्तकों का विमोचन मंत्री जी एवं सभी अतिथियों द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में श्री श्याम बिहारी गुप्त जी अध्यक्ष गौ सेवा आयोग उत्तर प्रदेश ने बताया कि गाय के दूध से 3 गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट गाय के मूत्र में, गोबर के रस में होता है। प्रतिदिन गोमूत्र का सेवन करने से अनेको बीमारियां दूर होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की थाली में जहर मुक्त भोजन देने के लिए गाय का सहारा लेना होगा। विकसित भारत का संकल्प पूरा करने हेतु पंचगव्य, आयुर्वेद, और गौ वंश का आधार लेना होगा।

आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ0 दया शंकर मिश्र दयालु जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोरखपुर गोरक्ष पीठ है, गौ रक्षा हमारा परम लक्ष्य है। गांव के किसान की समृद्धि गाय से ही है। कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से केंचुए, पक्षी सब विलुप्ति के कगार पर हैं। गोबर की खाद, जैविक खाद,जैविक खेती ही आज के समय की मांग है। उन्होंने बताया कि पंचगव्य तथा आयुर्वेद की मानव स्वास्थ में बहुत उपयोगिता है। उन्होंने कहा कि हमे अपने अतीत से जुड़ने का अवसर पंचगव्य और आयुर्वेद प्रदान करता है।

राष्ट्रीय जंतु कल्याण बोर्ड एवं राष्ट्रीय पंचगव्य अनुसंधान परिषद के सदस्य श्री सुनील मानसिंहका जी ने बताया कि गर्भ काल के अंतिम दिनों में देसी गाय का गोमूत्र एवं गोमय रस 10 से 20 उस प्रतिदिन पिलाने से सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है। घाव धोने के लिए गोमूत्र का प्रयोग करने से घाव शीघ्र भर जाते हैं। गोमय मसि से बना हुआ मंजन करने से दांतों की झनझनाहट दूर होती है। पंचगव्य साबुन से स्नान करने से त्वचा रोगों से छुटकारा मिलता है। पंचगव्य पांच चीजों से मिलकर बनता है जिसमें देसी गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोमय रस होता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की 4 मूलभूत गाय की प्रजातियों को संरक्षण करना हमारी प्राथमिकता है।

डॉ0 मनीष कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, महाराणा प्रताप आयुर्वेद कॉलेज कानपुर ने बताया कि सभी समृद्धियों की अधिष्ठात्री गौ माता है। उन्होंने बताया कि देसी गाय के गौ मूत्र के अर्क से पुराने से पुराने घाव को धोने से, पट्टी करने से जल्दी ठीक हो जाता है। केमिकल वाला मलहम लगाने की अपेक्षा गौ मूत्र की पट्टी से आधे समय में ही घाव ठीक हो जाता है। गौ मूत्र एंटी माइक्रोबियल एजेंट की तरह कार्य करता है।

आयुष महानिदेशक श्री जी.एस. प्रियदर्शी जी ने कहा कि हमारा ध्यान चिकित्सालयों में दवाओं को उपलब्ध कराने पर है। आयुर्वेद अस्पतालों में पंचगव्य द्वारा चिकित्सा हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार जी ने कहा कि आईआईटी कानपुर में एक सेंटर ऑफ एक्सिलेंस आयुष विभाग के सहयोग से शीघ्र खोला जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य महोदया प्रो0 सुधा सिंह जी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 शची श्रीवास्तव जी ने किया । कार्यक्रम में निदेशक आयुर्वेद डॉ0 नारायण दास, निदेशक होम्योपैथी डॉ0 प्रमोद कुमार, निदेशक यूनानी डॉ0 जमाल अख्तर की उपस्थिति रही। इस अवसर पर पंचगव्य उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

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