
अलीगढ़ : आगरा रोड स्थित सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल में 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के अवसर पर वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों, शिक्षाविदों और युवा वैज्ञानिकों का भव्य जमावड़ा देखने को मिला। इस आयोजन में शहर के विभिन्न विद्यालयों से आए बच्चों ने अपने अनोखे वैज्ञानिक मॉडल, रिसर्च आधारित प्रोजेक्ट्स और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इनोवेटिव आइडियाज प्रस्तुत किए। सभी का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के माध्यम से देश के विकास में अपना योगदान देना था।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय और सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल के संयुक्त प्रयास से CSIR और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं प्रोफेसरों द्वारा बच्चों के इन प्रोजेक्ट्स का गुणवत्तापरक मूल्यांकन किया गया। जूरी पैनल में सेवानिवत्त्त्त प्रोफेसर ए.के.एस. चौहान, प्रो. विनीत गुप्ता, प्रो. संगीत कुमार, प्रो. इकराम (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग), प्रो. रियाज (जूलॉजी विभाग), प्रो. अनवर शहजाद (बॉटनी विभाग) और डॉ. नीलम शर्मा शामिल रहे। सभी जूरी सदस्यों ने बच्चों के प्रत्येक प्रोजेक्ट को बारीकी से समझा, उनकी वैज्ञानिक सोच और उपयोगिता का मूल्यांकन किया तथा निर्धारित मानकों के अनुसार अंक प्रदान किए।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. पूरन सिंह’ ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों ने कई ऐसे संभावनाओं से भरे आइडियाज प्रस्तुत किए हैं, जिन्हें सही दिशा और संसाधन मिलने पर भविष्य में बेहद शानदार परिणामों में बदला जा सकता है।
जयपुरिया स्कूल को इस आयोजन की मेजबानी के लिए चुने जाने का प्रमुख कारण यहां उपलब्ध विश्वस्तरीय वैज्ञानिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक और प्रैक्टिकल एवं प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई का मजबूत वातावरण रहा।
उन्होंने बताया कि ब्लॉक लेवल पर चयनित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के अंतर्गत बाल वैज्ञानिकों का जनपद स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में 195 छात्र और छात्राओं का प्रोजेक्ट प्रस्तुतीकरण किया गया इसके पश्चात जूरी द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद ’पांच प्रोजेक्ट्स को अगले चरण के लिए चयनित जाएगा, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त पांच प्रोजेक्ट्स को रनर-अप के रूप में सुरक्षित जाएगा।’
जिला समन्वयक जिला विज्ञान क्लब राजीव अग्रवाल ने 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम “Science and Innovation for Sustainability” यानी सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रिसर्च की भावना और समाज की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
इस अवसर पर स्कूल के चेयरमैन इंजीनियर सुमित सर्राफ ने कहा कि अलीगढ़ की पहचान केवल ताले जैसे मेटल आधारित उत्पादों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इस शहर ने देश को पेटीएम के संस्थापक जैसे टेक्नोक्रेट और उद्यमी भी दिए हैं। मुझे बेहद खुशी है कि मेरा स्कूल ऐसे होनहार बच्चों को तैयार करने की दिशा में ईमानदारी से काम कर रहा है, जो आने वाले समय में वैज्ञानिक, इनोवेटर और सफल उद्यमी बनकर देश का नाम रोशन करेंगे। हमारा सपना है कि ये बच्चे विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
स्कूल की डायरेक्टर आकांक्षा सर्राफ ने कहा कि जयपुरिया के विद्यार्थी केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलकूद और परफॉर्मिंग आर्ट्स में भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर बच्चे को अपनी रुचि और प्रतिभा पहचानने तथा उसे निखारने के लिए एक बेहतर मंच मिले।
स्कूल मेंटर नितिन पचौरी ने स्कूल की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और तकनीक आधारित पढ़ाई के बारे में बताते हुए कहा कि हम अपने विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रख रहे हैं, बल्कि उन्हें एक संपूर्ण अकादमिक सपोर्ट सिस्टम दे रहे हैं। हमारे Jaipuria Aligarh School App पर क्लास की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग, स्टडी पीडीएफ और समयबद्ध, टॉपिक-वाइज टेस्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे बच्चों को बाहर की कोचिंग पर निर्भर रहने की आवश्यकता काफी कम हुई है। अब उनका कीमती शाम का समय हमारे आधुनिक स्किल-बेस्ड STEM लैब में प्रैक्टिकल करने, नए प्रयोग करने और अपनी क्रिएटिविटी को विकसित करने में लग रहा है। हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को भविष्य की तकनीक से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने के काबिल बनाना है, जिससे वे आगे चलकर बड़े इनोवेटर और सफल एंटरप्रेन्योर बन सकें।
स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी उपाध्याय ने डीआईओएस कार्यालय की पूरी टीम सभी जूरी सदस्यों, अतिथियों, प्रतिभागी विद्यार्थियों और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी दिशा में 22 नवंबर को एक विशेष कैंप का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जिला स्तर पर लगातार होने चाहिए, ताकि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि, नई चीजें सीखने की जिज्ञासा, रिसर्च करने की आदत और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित हो। आज के यही बच्चे कल के वैज्ञानिक, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और उद्यमी बनेंगे और भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।
कार्यक्रम का समापन उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन, आधुनिक संसाधन और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले, तो वे छोटी उम्र में भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।










