
चंद्रपाल सिंह की दो काव्य संग्रहों का विमोचन
लखनऊ। नवसृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था तथा प्रकाशक द्वारा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में भारत की आजादी के वर्ष 1947 में जन्मे वरिष्ठ साहित्यकार-कवि चंद्रपाल सिंह ‘चंद्र’ (लगभग 69 वर्ष) की दो काव्य-संग्रह पुस्तकों—‘मुक्ति का अभयदान’ और ‘आइए मनन करें’—का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक यूपी महेश चंद द्विवेदी तथा पूर्व अध्यक्ष, भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. (डॉ.) ओमप्रकाश पाण्डेय ने विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सचेत जीवन, करुणा, विवेक और कर्मयोग से युक्त मानव जीवन जीने पर जोर देने के साथ अज्ञान, अहंकार, लोभ, अंधविश्वास, पाखंड और नैतिक पतन से भी मुक्ति आवश्यक है।
मुख्य वक्ताओं डॉ. शिवमंगल सिंह ‘मंगल’, डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी (पूर्व सलाहकार सदस्य) तथा डॉ. सुधा मिश्रा, मंजू सक्सेना ने दोनों काव्य-संग्रहों की समीक्षा करते हुए कहा कि कवि जीवन में प्रेम, स्नेह, सौहार्द और भाईचारे के साथ देश व समाज में राष्ट्रीय एकता, अखंडता, विकास तथा समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति चाहते हैं।
कवि चंद्रपाल सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन होता जा रहा है। मन की संकीर्णता से ग्रस्त होकर ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ को भूल रहा है और संवेदनहीन हो गया है। स्वार्थ में डूबा मनुष्य केवल अपना हित देख रहा है। समाज पतन की ओर न जाए, इसके लिए चिंतन-मनन कर मानव कल्याण को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए। विवेकपूर्ण लेखन और सकारात्मक-रचनात्मक कार्यों से ही सर्वजन हित संभव है।
कवि की एक कविता ‘बनेगा भारतवर्ष महान’ में देश-समाज के प्रति उनका चिंतन स्पष्ट झलकता है—
एक से बढ़कर एक घाघ हैं, अपने और पराए।
मौके की तलाश में बैठे, अपनी घात लगाए।
चूक हुई सब नोचेंगे, तिल-तिल तन की चमड़ी।
लूटेंगे मेहनत की पूंजी, दुश्मन दमड़ी-दमड़ी।
देश-भक्त का जामा पहने, नेता बना लुटेरा…
विमोचन के अवसर पर नवसृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने विचारों, कविताओं और उपस्थिति से समारोह को गौरवान्वित करने हेतु वाग्देवी संजना सर्जना सम्मान से कवि चंद्रपाल सिंह, उप-निदेशक सूचना एवं समाजसेवी प्रमोद कुमार, समाजसेवी उपेंद्र वाजपेयी, टीचर ऋचा सिंह, सचिन, आलोक सिंह, समीक्षक डॉ. सुधा मिश्रा आदि को सम्मानित किया।

वरिष्ठ साहित्यकार उपेंद्र बाजपेयी ने अपनी माता की स्मृति में कवि चंद्रपाल सिंह को सरस्वती बाजपेयी सुस्मृति सम्मान, पिता की स्मृति में धनानंद पांडे को जीवनलाल बाजपेयी सुस्मृति सम्मान तथा जीवनसंगिनी की स्मृति में साहित्यकार जितेंद्र मिश्र को शशि बाजपेयी सुस्मृति सम्मान प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और सफल संचालन नवसृजन के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ. योगेश ने किया। सुश्री श्वेता शुक्ला, विजय कुमारी मौर्य, रामप्रकाश शुक्ल, मनमोहन बासकोटी, पूजा श्रीवास्तव, प्रेमशंकर शास्त्री, विशाल, सविता, डॉ. योगेश आदि उपस्थित रहे।
उपस्थित सभी जनों को प्रकाशक नवसृजन (डॉ. योगेश) और पुस्तक लेखक चंद्रपाल सिंह द्वारा दोनों काव्य-संग्रह निशुल्क वितरित किए गए। उपस्थित जनों ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि अक्सर लेखक और प्रकाशक पुस्तक-विमोचन के नाम पर स्टाल लगाकर किताबें बेचते हैं, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं हुआ। इसके लिए लेखक और प्रकाशक को धन्यवाद एवं साधुवाद।











