
लखनऊ, 30 जुलाई। समाजवादी पार्टी (सपा) छात्र सभा के नेतृत्व में गुरुवार को राजधानी लखनऊ के 1090 चौराहे पर हजारों छात्रों-नौजवानों ने धरना देकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालयों में फीस बढ़ोतरी वापस लेने, छात्र संघ चुनाव बहाल करने, बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के 30 दलित छात्रों के निष्कासन को रद्द करने, उन पर लगाए गए भारी आर्थिक जुर्माने को समाप्त करने, रामपुर के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश को वापस लेने और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रदर्शन की मुख्य सपा
छात्र सभा के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार हर युवा का मौलिक अधिकार है। विश्वविद्यालयों में लगातार फीस बढ़ाई जा रही है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग दोहराई, ताकि छात्रों की आवाज लोकतांत्रिक तरीके से सुनी जा सके।
विशेष रूप से बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ में 30 दलित छात्रों के निष्कासन और उन पर लगाए गए भारी जुर्माने को प्रदर्शनकारियों ने जातिगत भेदभाव करार दिया। उन्होंने मांग की कि इन छात्रों को तुरंत बहाल किया जाए और जुर्माना माफ किया जाए। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को भी वापस लेने की अपील की गई।
पेपर लीक पर भी आक्रोश
प्रदर्शन में पेपर लीक के मुद्दे पर भी जोरदार नारेबाजी हुई। छात्रों ने कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और लीक की घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने सरकार से सख्त कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने की मांग की।
माहौल और नारे
1090 चौराहे पर जमा हजारों छात्रों-नौजवानों ने नारे लगाए— “फीस बढ़ोतरी वापस लो”, “छात्र संघ चुनाव बहाल करो”, “दलित छात्रों पर अत्याचार बंद करो” और “पेपर लीक के दोषियों को सजा दो”। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन छात्रों के आक्रोश साफ झलक रहा था। सपा छात्र सभा के नेताओं ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
आगे की रणनीति
सपा छात्र सभा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से तुरंत संवाद शुरू करने की अपील की है।
यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर युवा आक्रोश का ताजा उदाहरण है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, समान अवसर और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग अब और जोर पकड़ती दिख रही है।











