लव लॉटरी: प्यार, विश्वासघात और असली रिश्तों की कहानी,18 सितंबर से भारत के सभी सिनेमा हॉल में रिलीज

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आजकल ज्यादातर युवक-युवतियों को घूमना-फिरना, मस्ती और अस्थायी रिश्ते तो बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन जब बात जीवनभर की डोर पकड़ने यानी शादी और स्थायी रिश्ते की आती है, तो हिचकिचाहट और डर सामने आ जाता है। लव, इंगेजमेंट और हरामखोरी में नंबर वन रहने वाले कई रिश्ते अंत में बवाल और कानूनी उलझनों में बदल जाते हैं। खासकर लड़कियां अक्सर अपने माता-पिता से बात नहीं खोल पातीं, और अगर खोलती भी हैं तो स्थिति और जटिल हो जाती है।

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इसी यथार्थ को आधार बनाकर निर्देशक अरविंद पांडे और निर्माता कुलदीप भार्गव तुषार की फिल्म लव लॉटरी आ रही है। सिनेमा गंज बैनर के तहत बनी यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। इसमें कलाकार अक्षय ओबेरॉय, कार्तिक सक्सेना, हैली दारूवाला, भरनी वर्मा, विजयंत कोहली, अग्नि आग्यारी, हेमंत पांडे और लखनऊ के राजीव शुक्ला समेत कई कलाकार शामिल हैं।

फिल्म क्या कहती है?

लव लॉटरी आधुनिक रिश्तों, शादी, प्यार, विश्वासघात और उससे जुड़े कानूनी विवादों पर गहराई से बात करती है। फिल्म पुरुषों के अधिकारों और उनके उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी फिल्मी अंदाज में सामने लाती है। कहानी प्यार, विश्वास, संदेश और न्याय की लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है। दर्शक अंत तक सोचते रह जाते हैं कि आखिर सच कौन बोल रहा है और गलत कौन।

फिल्म दिखाती है कि आधुनिक रिश्तों की चमक-दमक के पीछे अविश्वास, छल और भावनात्मक संघर्ष कैसे छिपे होते हैं। घरेलू हिंसा के नाम पर झूठे केस दर्ज होने, कानूनी दाव-पेंच और बेगुनाही साबित करने की लंबी जद्दोजहद जैसी स्थितियों को भी इसमें जगह दी गई है। ट्रेलर से साफ होता है कि फर्जी मामलों में महिलाओं का नुकसान कम होता है, जबकि पुरुष अक्सर बर्बादी की तरफ बढ़ जाता है—आत्महत्या जैसे विचार या शादी को लेकर नकारात्मक सोच पैदा होने लगती है।

क्यों देखें लव लॉटरी?

यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं देती। यह सच्चे प्रेम और असली रिश्तों की पहचान कराने का प्रयास करती है। परिवार के साथ देखने योग्य और शिक्षाप्रद है। प्यार हमेशा वैसा नहीं होता जैसा दिखता है—यह संदेश फिल्म साफ-साफ देती है।

लव लॉटरी 18 सितंबर से भारत के सभी सिनेमा हॉल में रिलीज हो रही है। अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरूर देखें। मनोरंजन के साथ सोचने को मजबूर करने वाली यह फिल्म रिश्तों पर नई नजर डालने का मौका देती है।

— डॉ. ऋतिक कटारिया / अभिषेक दत्त / रमा सिंह

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