प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल बनी विद्युत सखी योजना

0
0
Advertisement

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में संचालित विभिन्न योजनाएं सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रही हैं। इसी क्रम में विद्युत सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, स्वरोजगार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की एक प्रभावी पहल बनकर उभरी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित इस योजना ने जहां ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत बिल भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाया है, वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सम्मानजनक आय अर्जित करने और समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित करने का अवसर भी दिया है। शामली जनपद की अनीता की सफलता इस परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है।
मा. मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास को महिलाओं की भागीदारी से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दे रही है। विद्युत सखी योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसके माध्यम से ग्रामीण महिलाएं बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सेवाएं प्रदान कर रही हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बिजली का बिल जमा करने के लिए विद्युत उपकेंद्रों तक जाना पड़ता था। अब विद्युत सखियां घर-घर पहुंचकर बिल संग्रहण और भुगतान की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। इससे उपभोक्ताओं का समय और श्रम बचने के साथ ही विद्युत राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया भी अधिक सहज एवं पारदर्शी हुई है।
इस योजना के अंतर्गत चयनित महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण देकर स्मार्टफोन और ब्लूटूथ थर्मल प्रिंटर जैसे उपकरणों के माध्यम से डिजिटल भुगतान एवं बिल संग्रहण की प्रक्रिया से जोड़ा जाता है। आधिकारिक एप्लिकेशन के जरिए वे उपभोक्ताओं के बिजली बिल की जानकारी प्राप्त कर भुगतान स्वीकार करती हैं और रसीद उपलब्ध कराती हैं। इस कार्य के बदले उन्हें निर्धारित प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 2,000 रुपये तक के बिल संग्रहण पर प्रति बिल 20 रुपये तथा इससे अधिक के बिल पर संग्रहित राशि का एक प्रतिशत प्रोत्साहन दिए जाने की व्यवस्था महिलाओं के लिए आय का नियमित संसाधन उपलब्ध करा रही है।
इस योजना की सफलता की कहानी शामली जनपद के ऊन विकास खंड स्थित हसनपुर गांव की 35 वर्षीय श्रीमती अनीता से जुड़ी है। भारती महिला ग्राम संगठन के अंतर्गत संचालित सृष्टि स्वयं सहायता समूह की सदस्या श्रीमती अनीता का जीवन कुछ वर्ष पहले तक आर्थिक चुनौतियों से घिरा हुआ था। उनके पति गांव में छोटी-सी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते थे। सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर संसाधन जुटाना कठिन था।
वर्ष 2018 में गांव में सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) अभियान के दौरान अनीता सृष्टि स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि से ऋण प्राप्त किया और उससे अपने पति के व्यवसाय का विस्तार करने में सहयोग दिया। स्वयं सहायता समूह से मिली प्रेरणा ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ने का संबल दिया।
वर्ष 2022 में अनीता का चयन विद्युत सखी के रूप में हुआ। यह अवसर उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने गांव-गांव और घर-घर जाकर विद्युत बिल संग्रहण का कार्य शुरू किया। शुरुआत में सामाजिक संकोच और नई जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने मेहनत, लगन और कर्तव्यनिष्ठा से अपनी अलग पहचान बनाई। धीरे-धीरे ग्रामीण उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ा और उनके काम का दायरा भी विस्तृत होता गया।
अनीता ने अब तक 7 करोड़ रुपये से अधिक का विद्युत राजस्व संग्रहित कर बिजली विभाग के कोष में जमा कराया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक वह 7 लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि अर्जित कर चुकी हैं। वर्तमान में उन्हें इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 20,000 से 25,000 रुपये तक की आय हो रही है। उनकी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार ऋणमुक्त भी हो चुका है। आज अनीता अपने क्षेत्र में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाती हैं।
विद्युत सखी के रूप में मिली सफलता ने अनीता को आर्थिक मजबूती के साथ सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास भी प्रदान किया है। अब वह अपनी ग्राम पंचायत और आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। उनका अनुभव बताता है कि उचित अवसर, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं परिवार की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
मा. मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही विद्युत सखी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डिजिटल सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अनीता जैसी महिलाओं की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़कर उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। विद्युत सखी योजना केवल बिजली बिल संग्रहण की व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबन, सम्मान और नए अवसरों से जोड़ने वाली ऐसी पहल है, जो प्रदेश में समावेशी ग्रामीण विकास की दिशा को नई गति प्रदान कर रही है।

Advertisement
Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here