ग्रामीण विकास एवं जनसेवा का प्रेरक मॉडल बन रहीं ग्राम पंचायतें, गाजियाबाद की ग्राम पंचायत कुम्हैड़ा बनी मिसाल

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उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद अंतर्गत विकास खंड मुरादनगर की ग्राम पंचायत कुम्हैड़ा आज राज्य में समग्र ग्रामीण विकास, पारदर्शी जनसेवा और आधुनिक बुनियादी ढांचे की एक विशिष्ट मिसाल बनकर उभरी है। प्रदेश सरकार की ‘योजनाएं जनता के द्वार‘ की नीति को धरातल पर क्रियान्वित करते हुए इस ग्राम पंचायत ने यह सिद्ध किया है कि सुदृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सक्रिय जनसहभागिता से ग्राम्य जीवन में व्यापक गुणात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
जनपद गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र में स्थित इस गांव के सामान्य नागरिक पूर्व में सुविधाओं एवं शासकीय अभिलेखों के लिए तहसील व जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने को विवश थे। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के समन्वित प्रभाव तथा जिला प्रशासन के सतत मार्गदर्शन से अब यह निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। गांव में ही आवश्यक सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित होने से ग्रामीणों के समय और धन की सीधी बचत हो रही है तथा शहरों की ओर अनावश्यक आवागमन थम गया है।
ग्राम पंचायत में सुसज्जित पंचायत सचिवालय को ग्रामीण सुशासन के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां पंचायत सहायक के माध्यम से ई-डिस्ट्रिक्ट एवं विभागीय पोर्टलों की सेवाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, फैमिली आईडी, आयुष्मान कार्ड तथा पैन कार्ड जैसी आवश्यक सेवाएं ग्रामीणों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बिना किसी विलंब के उनके गांव में ही प्राप्त हो जा रही हैं।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन एवं दिव्यांगजन पेंशन योजनाओं का शत-प्रतिशत आच्छादन इसी केंद्र से सुनिश्चित किया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ग्राम सभाओं, नियमित जनचौपालों तथा सार्वजनिक भवनों पर सूचना पटों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इससे योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पूर्ण निष्पक्षता और जवाबदेही स्थापित हुई है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत कुम्हैड़ा में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की एक सुदृढ़ व्यवस्था लागू की गई है। गांव के प्रत्येक घर से कचरा उठाने के लिए डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण प्रणाली संचालित है। एकत्रित अपशिष्ट के वैज्ञानिक व पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण हेतु रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) स्थापित किया गया है, जहां सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग छांटकर निस्तारित करने की आधुनिक पद्धति अपनाई गई है।
कचरा प्रबंधन को आत्मनिर्भरता और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए ग्राम पंचायत में जैविक अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) तैयार की जा रही है। इस खाद का उपयोग सार्वजनिक उद्यानों और कृषि में किया जा रहा है। इसके साथ ही प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य अजैविक कचरों की छंटाई कर उनका नियमानुसार निस्तारण किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगा है और पंचायत की आंतरिक आय (ओन सोर्स रेवेन्यू) में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ग्राम पंचायत द्वारा ‘कबाड़ से कला‘ (वेस्ट टू वेल्थ) का एक अनूठा और अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया गया है। गांव के पारंपरिक तालाबों की गहन सफाई के दौरान भारी मात्रा में निकली अनुपयोगी प्लास्टिक और पन्नी को प्रसंस्कृत कर आकर्षक एवं टिकाऊ बेंचों का निर्माण कराया गया है। इन पर्यावरण-अनुकूल बेंचों को तालाब के किनारे स्थापित किया गया है, जो ग्रामीणों के बैठने के काम आने के साथ-साथ नवाचार का सजीव उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
जल संरक्षण एवं भूजल स्तर सुधार के उद्देश्य से ग्राम पंचायत में पारम्परिक जलस्रोतों का जीर्णाेद्धार प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कॉर्पाेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के सहयोग से तालाब के चारों ओर पक्के तटबन्ध, हरियाली और पैदल पथ विकसित किए गए हैं। गंदे और दूषित पानी को तालाब में जाने से रोकने के लिए इनलेट पर फिल्टर चौंबर (सिल्ट डिटेंशन चौंबर) निर्मित किए गए हैं, जिससे शोधित व स्वच्छ जल ही जलाशय में पहुंचे।
ग्रामीण स्वास्थ्य और जीवन स्तर को उन्नत बनाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत निर्मित पेयजल टंकी और पाइपलाइन प्रणाली से हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इसके साथ ही गांव में निर्मित सामुदायिक शौचालयों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया गया है। सफाई कर्मियों के निर्धारित रोस्टर के अनुसार संपर्क मार्गों, गलियों और पक्की नालियों की दैनिक सफाई से गांव में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हुआ है तथा संक्रामक रोगों से बचाव में सहायता मिल रही है।
ग्राम्य युवाओं के बौद्धिक सशक्तीकरण और शैक्षणिक उन्नयन के लिए ग्राम पंचायत में एक आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई है। कम्प्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, प्रिन्टर तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की स्तरीय पुस्तकों और पत्रिकाओं से सुसज्जित यह लाइब्रेरी ग्रामीण युवाओं के लिए अध्ययन का उत्कृष्ट केंद्र बन चुकी है। अब गांव के मेधावी छात्र-छात्राओं को सिविल सेवा, इंजीनियरिंग, मेडिकल या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महानगरों में जाकर अतिरिक्त व्यय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
युवाओं और नागरिकों में स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए गांव में ओपन जिम का निर्माण कराया गया है। इस खुले व्यायामशाला में विभिन्न प्रकार के आधुनिक फिटनेस उपकरण स्थापित किए गए हैं, जिनका लाभ युवा, बुजुर्ग और महिलाएं प्रतिदिन उठा रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर खेल और फिटनेस अधोसंरचना के इस विस्तार से गांव में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिली है।

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