
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग करा रहा विशेष व सामान्य शिक्षकों का उन्मुखीकरण; प्रमाणन व शैक्षिक सहयोग होगा सुगम
कक्षा 1 से 8 तक के 71 हजार से अधिक बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए समन्वित प्रयास कर रही योगी सरकार
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा डिस्लेक्सिया जागरूकता अभियान के अंतर्गत राजधानी लखनऊ में राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विद्यालयों में डिस्लेक्सिया (विशिष्ट अधिगम अक्षमता – से प्रभावित बच्चों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान, उनकी विशिष्ट शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति, सुगम दिव्यांगता प्रमाणन प्रक्रिया तथा समावेशी शिक्षा के प्रति शिक्षकों एवं संबंधित हितधारकों को दक्ष व संवेदनशील बनाना है।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के राज्य आयुक्त (दिव्यांगजन) प्रो. हिमांशु शेखर झा ने कहा कि डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की बौद्धिक क्षमता ; सामान्यतः बहुत अच्छी होती है। उन्होंने कहा कि डिस्लेक्सिया एक ‘अदृश्य दिव्यांगता’ है, जिसके कारण समाज में इसकी पहचान और इसके प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है। आवश्यकता इस बात की है कि इन बच्चों की सीखने की विशिष्ट शैली व जरूरतों को संवेदनशीलता से समझा जाए। समाज के सभी वर्गों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को मिलकर प्रयास करना होगा ताकि इन बच्चों को शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। उन्होंने रेखांकित किया कि योगी सरकार दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित राय ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुगम दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने, व्यापक जन-जागरूकता और आवश्यक मानव संसाधन विकास के लिए पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा विभाग तथा इस क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित विशेषज्ञ संस्थाओं के साथ अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित कर प्रभावी कदम उठा रहा है।
प्रशिक्षण सत्र में डिस्लेक्सिया विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण प्रदान करते हुए चेंजइंक फाउंडेशन के कंसल्टेंट अमरेश चंद्र ने महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि यू-डायस आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 71,000 बच्चे विशिष्ट अधिगम अक्षमता से प्रभावित के रूप में चिन्हित किए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण, समय पर स्क्रीनिंग व पहचान, उपचारात्मक शैक्षिक सहयोग और प्रमाणन प्रक्रिया को और अधिक सरल व सुदृढ़ बनाना आवश्यक है। इस दिशा में तकनीकी सहयोग देने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं, विशेष शिक्षकों, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और शिक्षा विभाग को एक मंच पर आकर काम करना होगा, जिससे बच्चों को उनके विधिक अधिकार और समान अवसर मिल सकें।
इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए विशेष शिक्षकों एवं सामान्य शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को डिस्लेक्सिया के व्यावहारिक लक्षणों की समझ विकसित करने, कक्षा-कक्ष में बच्चों की पहचान करने तथा उनकी विशिष्ट सीखने की गति के अनुरूप शिक्षण पद्धतियां अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
कार्यक्रम के सफल संयोजन एवं आयोजन में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी दीपक जायसवाल एवं संजय कुमार का विशेष योगदान रहा।











