
लखनऊ/अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। विशेष जांच दल (SIT) की जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच 70 बार चोरी की घटनाएं सीसीटीवी फुटेज में कैद मिली हैं। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई है।
SIT जांच के प्रमुख अपडेट (जुलाई 2026 तक)
- – 70 घटनाओं का खुलासा: SIT ने 42 दिनों की अवधि में 70 संदिग्ध चोरी की घटनाएं दर्ज कीं। फुटेज में कर्मचारियों द्वारा नोट छिपाने और गिनती में गड़बड़ी की गतिविधियां साफ दिखाई दीं।
- – गिरफ्तारियां: SIT ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव आदि शामिल हैं। सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
- – नकदी बरामदगी: जांच के दौरान 70 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किया गया है। नोटों की गिनती अभी भी जारी है।
- – ट्रस्ट पर सवाल: रिपोर्ट में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और बैंक की निगरानी व्यवस्था में बड़ी कमियां पाई गई हैं। पिछले 5 साल के खातों का दोबारा ऑडिट किए जाने की संभावना है।
SIT का गठन: उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT गठित की थी। टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी। जांच अभी भी जारी है और अंतिम रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
* राम मंदिर ट्रस्ट ने कुछ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
* ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने दावा किया कि मंदिर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान सुरक्षित हैं। ट्रस्ट ने इन वस्तुओं को मीडिया के सामने प्रदर्शित भी किया।
* ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय सहित कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे और नए CEO की नियुक्ति पर चर्चा हुई।
* फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी करने से मना कर दिया।
मामले का यह
घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। भक्तों की आस्था से जुड़े मंदिर में हुई इस तरह की गड़बड़ी ने सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और कर्मचारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चढ़ावे की गिनती, जमा करने और बैंक ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। SIT की जांच में बड़े पैमाने पर सिस्टेमेटिक गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है, जिसकी जांच पिछले 2-3 साल तक भी जा सकती है।
जांच जारी: SIT ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर और समय लिया जाएगा। मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, लेकिन सरकार का फोकस निष्पक्ष जांच पर है।











