
लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज इलाके (उषा मेहता मार्ग) में गत सोमवार को तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है।
डॉक्टरों और सूत्रों के अनुसार, किसी भी शव पर गंभीर बाहरी चोट या बुरी तरह जलने के स्पष्ट निशान नहीं पाए गए। अधिकांश मृतकों के चेहरे और आंखों के आसपास सूजन देखी गई। नाक के अंदर कालिख (सूट) और धुएं के कण मिलने से साफ हो गया कि मरने से पहले उन्होंने भारी मात्रा में जहरीला धुआं सांस के साथ अंदर लिया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:-
-सभी 15 मौतें **Smoke Inhalation (Asphyxiation)** से हुईं।
– बाहरी जलन या गहरे घाव के कोई बड़े सबूत नहीं मिले।
– चेहरे-आंखों में सूजन और नाक में धुएं के कण पाए गए।
– ज्यादातर मृतक युवा छात्र थे, जो इमारत में चल रहे एनिमेशन कोर्स से जुड़े थे।
पुलिस और फायर विभाग की प्रारंभिक जांच में इमारत में फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी और संकरी निकासी मार्ग को मुख्य कारण माना जा रहा है। आग की चपेट में आने वाले कई लोग धुएं के कारण बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल पाए।
अधिकारियों का बयान
एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने बताया, “इस तरह की घटनाओं में ज्यादातर मौतें जलने से नहीं बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीले गैसों से दम घुटने से होती हैं। यही कारण है कि शवों पर बाहरी चोट कम दिखाई देती है।”
घटना की पृष्ठभूमि
22 जून 2026 को दोपहर के समय इमारत के निचले तल पर आग लगी, जो तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। स्थानीय लोगों और छात्रों ने बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। प्रशासन की कार्रवाई मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। फायर विभाग और बिल्डिंग मालिक के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है।











