उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने जारी किया आगामी सप्ताह हेतु मौसम आधारित कृषि परामर्श

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रबी फसलों की बुवाई दो से तीन दिन स्थगित करने तथा खेतों में पर्याप्त नमी होने पर ही कार्य आरंभ करने की सलाह

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धान के अवशेष न जलाने एवं गुणवत्तायुक्त बीजों के चयन हेतु किसानों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर आगामी सप्ताह हेतु मौसम आधारित विस्तृत कृषि परामर्श जारी किया गया है। उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में संपन्न क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक में प्रदेश के मौसम परिदृश्य की समीक्षा करते हुए किसानों को सामयिक कृषि प्रबंधन के संबंध में आवश्यक तकनीकी दिशा-निर्देश दिए गए।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सप्ताह के आरंभिक चरण में प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु अंचलों में हल्की से मध्यम वर्षा के उपरांत मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है। बुंदेलखंड, विन्ध्य एवं मध्य मैदानी क्षेत्र के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य अंचलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन, वज्रपात तथा भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए किसानों को गेहूं, चना, मटर, मसूर, रबी मक्का तथा पछेती सरसों की बुवाई आगामी 2-3 दिनों तक स्थगित रखने की सलाह दी गई है। किसान खेतों में पर्याप्त नमी होने की दशा में ही बुवाई का कार्य सुनिश्चित करें। इसके साथ ही धान की फसल का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए कटाई के उपरांत दानों में 9 प्रतिशत तक नमी सुनिश्चित करके ही उसे बिक्री हेतु मंडी ले जाएं।
किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे खेतों में खरीफ फसलों विशेषकर धान के अवशेषों को कतई न जलाएं बल्कि अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं जिससे मृदा की उर्वरा शक्ति एवं जैविक तत्वों में वृद्धि हो सके। पराली के त्वरित अपघटन हेतु श्हेलो केयरश् उत्पाद का उपयोग किया जा सकता है जो केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में उपलब्ध है। भूमि एवं बीज जनित रोगों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी अथवा ट्राइकोडर्मा हारजिएनम को गोबर की खाद में मिलाकर बुवाई से पूर्व अंतिम जुताई के समय भूमि में मिलाने का परामर्श दिया गया है।
गेहूं की सिंचित दशा में समय से बुवाई हेतु डीबीडब्लू-187, डीबीडब्लू-826, पीबीडब्लू-915, एचडी-3428 जैसी उन्नत किस्मों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह में शुरू करने तथा पछेती सरसों के लिए आजाद महक एवं सुलेखा का चयन करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त जनपदों में विभागीय मूल्य पर उच्च गुणवत्तायुक्त आलू बीज उपलब्ध करा दिया गया है जहां किसान कुफरी बहार, कुफरी बादशाह, कुफरी आनंद सहित अन्य संस्तुत किस्मों के संपूर्ण कंद की बुवाई कर सकते हैं। किसानों एवं पशुपालकों को द्वार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट के टोल फ्री नंबर 1962 तथा बेमौसम वर्षा अथवा दैवीय आपदा से होने वाली क्षति के मुआवजे हेतु टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई है।

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