
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रांगण में 12 से 20 सितंबर तक चल रहे गोमती पुस्तक महोत्सव में आज भी पुस्तक प्रेमियों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। रंगमंच, बाल लेखक गंज और पुस्तक मेले में विभिन्न गतिविधियां जोरों पर रहीं। मेले में जैन समुदाय, जैन अल्फा और वरिष्ठ नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रवेश द्वार पर स्टॉल नंबर-1 पर भारतीय संविधान प्रचार समिति का स्टॉल लगा है। समिति का संकल्प है कि संविधान की प्रति हर घर तक पहुंचाई जाए। यहां वरिष्ठ नागरिक राम लोट बौद्ध संविधान की प्रस्तावना पढ़कर संकल्प लेते दिखे।
संविधान गैलरी का विधिवत उद्घाटन वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व उपनिदेशक (सूचना) प्रमोद कुमार, एसीई भीमराज, राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन के अध्यक्ष पीसी कुरील और वरिष्ठ पत्रकार रमेश ने किया। उन्होंने संविधान की प्रति को माथे से लगाया, प्रस्तावना पढ़ी और संविधान शिल्पी भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शत-शत नमन किया।
उद्घाटन के दौरान कहा गया कि किताब पढ़ना जरूरी है, लेकिन उस पर अमल करना और संवाद करना भी उतना ही आवश्यक है। अच्छी किताबें वास्तविक जानकारी देती हैं, ज्ञान बढ़ाती हैं और मन को सुकून भी पहुंचाती हैं।
मेले में बौद्ध साहित्य, डॉ. अंबेडकर साहित्य के साथ मुंशी प्रेमचंद, राहुल सांकृत्यायन, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, पेरियार, ललई सिंह यादव, जवाहरलाल नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी, एपीजे अब्दुल कलाम, सुभाष चंद्र बोस, झलकारी बाई, उदा देवी पासी, गौतम बुद्ध, सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, हवलदार अब्दुल हमीद, ज्योतिबा फुले, अब्राहम लिंकन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मान्यवर कांशीराम और पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती सहित कई महान व्यक्तित्वों एवं स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध हैं। संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी और आधुनिक वैज्ञानिक सोच वाली किताबें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
इसके अलावा बिसलेरी बोतलों के रीसाइकल से तैयार कुर्सी, मेज, बस्ते और झोले भी देखे जा सकते हैं। यहां रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है। बच्चों के बुक स्टॉल पर मानवी नाम की एक बच्ची किताबें बेचती मिली। विभिन्न प्रतियोगिताओं की जानकारी भी मेले में आसानी से उपलब्ध है।











