
राजधानी लखनऊ में दिवाली से पहले ही इस सीजन में पहली बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया है। इससे शहर की हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है।
शुक्रवार शाम तालकटोरा में AQI 304 दर्ज किया गया। शनिवार को आलमबाग सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा, जहां AQI 282 तक पहुंच गया। अलीगंज में 268 और तालकटोरा में 267 दर्ज हुआ। कुकरैल का AQI 152 और गोमतीनगर का 164 रहा।
तालकटोरा में शुक्रवार शाम PM2.5 का स्तर 152 और PM10 का स्तर 203 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं:
- निर्माण स्थलों पर मानकों का पालन न होने से धूल के महीन कण फैलना
- वाहनों की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक जाम से निकलने वाला धुआं
- पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहन
- तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने से प्रदूषक तत्व लंबे समय तक वातावरण में बने रहना
लखनऊ में हर साल लगभग 1.2 से 1.5 लाख नए वाहन सड़कों पर जुड़ते हैं। दिसंबर 2025 में पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 31.6 लाख थी, जो धनतेरस तक करीब 32.8 लाख पहुंच गई है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ. दर्शन बजाज ने कहा कि तापमान गिरने और हवा की गति कम होने पर प्रदूषक तत्व अधिक समय तक हवा में रहते हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण प्रदूषण को और बढ़ा सकते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य ने बताया कि हवा के दूषित होने के पीछे धूल प्रमुख वजह है। पुरानी गाड़ियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। नियंत्रण के लिए टीम रोजाना निरीक्षण कर रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य संबंधी सलाह
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
दिवाली के बाद स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखों के उपयोग से AQI और बढ़ सकता है।





