
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों के पश्चात, अब सरकार क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों यानी ब्लाक प्रमुखों को भी उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक (Administrator) के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपने जा रही है।
क्या है सरकार की नई व्यवस्था?
पंचायत राज विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, जिन क्षेत्रों में ब्लाक प्रमुखों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, वहां विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार इस संबंध में एक विस्तृत शासनादेश (Government Order) 18 जुलाई तक जारी करने की प्रक्रिया में है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर उन ब्लाक प्रमुखों पर लागू होगी, जिनका वर्तमान कार्यकाल 19 जुलाई को पूर्ण हो रहा है।
प्रशासक के रूप में सीमित रहेंगी शक्तियाँ
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रशासक के रूप में कार्य करने वाले ब्लाक प्रमुखों की शक्तियाँ सामान्य कार्यकाल की तुलना में सीमित रहेंगी।
वे मुख्य रूप से:
*क्षेत्र के आवश्यक और रूटीन (Routine) प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे।
*विकास कार्यों की फाइलों को गति प्रदान करना सुनिश्चित करेंगे ताकि जनता को असुविधा न हो।
*जब तक नई निर्वाचित परिषद् या अगली व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक वे स्थानीय शासन का एक सेतु (Bridge) बने रहेंगे।
प्रशासनिक दृष्टिकोण: विकास कार्यों पर न पड़े प्रभाव
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर विकास कार्यों की गति धीमी न हो। पंचायत चुनावों या अन्य प्रशासनिक कारणों से यदि नई नियुक्ति में देरी होती है, तो इन प्रशासकों की उपस्थिति से ब्लॉक स्तर की बुनियादी जरूरतों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर नहीं पड़ेगा। लखनऊ स्थित सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह एक पारदर्शी व्यवस्था है जिसे सुशासन के तहत लागू किया जा रहा है।











