टी.आर.सी. लॉ कॉलेज में साइबर कार्यशाला का आयोजन

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बाराबंकी। शनिवार को सतरिख स्थित टी.आर.सी. लॉ कॉलेज में साइबर स्पेस में सुरक्षा के उपाय विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक सतर्कता, लखनऊ डा. अरविन्द चतुर्वेदी ने साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा, तथा कारणों की जानकारी देकर विधि महाविद्यालय के छात्र छात्राओं को जागरुक भी किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से परिचर्चा भी की। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डा. अरविन्द चतुर्वेदी, प्रबन्धक डा. सुजीत चतुर्वेदी तथा प्राचार्य डा. अश्वनी कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। उद्घाटन से पूर्व छात्रा श्रृद्धा निगम ने गणेश वन्दना प्रस्तुत की।
एसपी विजिलेंस डा. चतुर्वेदी ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यालय के सूत्र वाक्य च्च्वृतं यत्नेन संरक्षेत्ज्ज् की व्याख्या कर बताया हमें अपने चरित्र की यत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए। धन तो आता है और चला जाता है लेकिन हमें अपने सभी प्रकार के चरित्रों की रक्षा करनी चाहिए चाहे वह हमारा व्यवसायिक चरित्र हो, पारिवारिक चरित्र हो, व्यवहारिक चरित्र हो। उन्होंने भारत की एकता तथा अखण्डता के नारे भी लगवाये। हमें साइबर स्पेस की सुरक्षा जंगल के राजा की तरह करना चाहिए। उन्होंने साइबर अपराध क्या है, डाटा स्टोरेज, डाटा को साझा करना, डाटा की सुरक्षा, साइबर अपराध के कारण, साइबर अपराध के घटक आदि पर विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए उपस्थित छात्र छात्राओं से प्रश्नोत्तरी वार्तालाप कर जागरूक भी किया। उन्होंने बताया साइबर स्पेस में कार्य करते समय अनजाने लिंक पर क्लिक न करें, अनजाने व्यक्ति को अपने खाता, ओटीपी, एटीएम कार्ड आदि की जानकारी न देें, पैसों के आॅनलाइन लेने देने में कभी अविश्वसनीय क्यूआरकोड को स्कैन न करें।
उन्होंने वर्तमान में हो रहे साइबर अपराध के प्रति सतर्क करते हुए कहा कि महिलाओं, छात्राओं आदि को कभी अपनी निजता को साझा नहीं करना चाहिए। साइबर अपराधी आपकी निजी तथा व्यक्तिगत फोटो, वीडियो, मोबाइल नम्बरों, सोशल मीडिया आदि का प्रयोग कर आपको परेशान कर सकते हैं तथा इनके प्रति सदैव सतर्क रहें। समाज में घटित हुई तमाम घटनाओं का उदाहरण देकर समझाया। मुख्य अतिथि ने साइबर अपराध के रोकथाम के लिए विभिन्न जानकारी दी जिसमें उन्होंने बताया कि यदि आपके साथ खाते से सम्बन्धित कोई अपराध व ठगी होती है तो आप 1930 पर तत्काल कॉल कर होने वाले अपराध से बच सकते हैं। १९३० के कार्य करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया साथ में यह भी बताया कि यदि कोई बैंक से सम्बन्धित फ्रॉड हुआ है तो कैसे कोई 1930 पर कॉल करके अपने पैसों को गलत हाथों में जाने से बचा सकता है।
कार्यशाला में उपस्थित पत्रकार बन्धुओं को विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अश्वनी कुमार गुप्ता द्वारा अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात् महाविद्यालय के प्रबन्धक डा. सुजीत चतुर्वेदी द्वारा मुख्य अतिथि डा. अरविन्द चतुर्वेदी को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के अन्त में प्रबन्धक द्वारा उपस्थित गणमान्य लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन कर रहे प्रवक्ता वीर विक्रम सिंह, डा. दीपमाला श्रीवास्तव, मंजय यादव, नवीन सिंह, अमजद अंसारी, धर्मेन्द्र यादव, अवनीश मिश्रा, रोहिणी त्रिपाठी, तब्बसुम फातिमा तथा भारी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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