परिवारों को आर्थिक आधार प्रदान करने में सफल हो रही बकरी पालन योजना

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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बकरी पालन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अनुदान संख्या-83 के अंतर्गत संचालित इस योजना हेतु शासन द्वारा 3 करोड़ 92 लाख 94 हजार रुपये की अनुपूरक वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत धनराशि का प्रदेश के विभिन्न जनपदों को उनकी मांग और आवश्यकता के सापेक्ष त्वरित आवंटन भी कर दिया गया है।
शासन द्वारा यह वित्तीय आवंटन अनुसूचित जातियों के लिए संचालित विशेष घटक योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को पशुपालन आधारित आजीविका के सुलभ अवसर उपलब्ध कराना, उनकी घरेलू आय में वृद्धि करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। बकरी पालन अत्यंत कम पूंजी में प्रारंभ होने वाला आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, जिससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को त्वरित लाभ प्राप्त होता है।
शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के क्रम में जनपद अलीगढ़ में इस योजना के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा आवंटित धनराशि का उपयोग निर्धारित मार्गदर्शिकाओं और वित्तीय नियमों के पूर्ण अनुपालन के साथ सुनिश्चित किया जा रहा है। जनपद अलीगढ़ में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। इस बार चयन प्रक्रिया में पूर्व में तैयार की गई प्रतीक्षा सूची को भी अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे पूर्व में आवेदन कर चुके पात्र नागरिक लाभ से वंचित न रहें। लाभार्थियों का चयन शासनादेशों में निर्धारित पात्रता मानकों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के अनुसार ही निष्पादित किया जा रहा है।
वर्तमान में जनपद अलीगढ़ के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप पात्र लाभार्थियों का चयन पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही, भविष्य के विस्तार और पारदर्शिता को दृष्टिगत रखते हुए 44 अन्य पात्र लाभार्थियों की एक विधिवत प्रतीक्षा सूची भी तैयार की गई है।
विभागीय प्राविधानों के अंतर्गत योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार पुरुष एवं महिला पशुपालक पात्र हैं। चयन प्रक्रिया में भूमिहीन परिवारों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं तथा दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही, आवेदक के पास पशुओं के सुरक्षित रख-रखाव के लिए पर्याप्त स्थल और बुनियादी व्यवस्था की उपलब्धता होना अनिवार्य किया गया है।
पशुपालन विभाग की अधिकृत संरचना के अनुसार योजना के अंतर्गत 5 मादा और 1 नर (5$1 इकाई) बकरी पालन मॉडल स्थापित किया जा रहा है। इस मानक इकाई की कुल परियोजना लागत 60 हजार रुपये निर्धारित है, जिसमें प्रदेश सरकार द्वारा 90 प्रतिशत यानी 54 हजार रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। लाभार्थी को केवल 10 प्रतिशत यानी 6 हजार रुपये का अंशदान करना होता है, जिससे निर्धन परिवारों पर आर्थिक भार नहीं पड़ता।
जनपद अलीगढ़ में पशुओं की खरीद और वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष रखने के लिए जिला स्तरीय व्यवस्था के तहत पारदर्शी खरीद कराई जाती है। लाभार्थियों को रोगमुक्त, स्वस्थ और उन्नत नस्ल के पशु चुनने की पूरी स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत क्रय किए गए सभी पशुओं की अनिवार्य ईयर-टैगिंग कराई जाती है, जिससे उनका भौतिक सत्यापन और डिजिटल अभिलेखीकरण सुगमता से सुनिश्चित हो सके।
पशुपालन को दीर्घकालिक और लाभप्रद उद्यम बनाने के लिए लाभार्थियों के तकनीकी प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान अथवा राजकीय प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से चयनित लाभार्थियों को वैज्ञानिक देख-रेख, संतुलित आहार, प्रजनन प्रबंधन और उन्नत पशुपालन विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है, ताकि पशुपालक आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी उत्पादकता में निरंतर वृद्धि कर सकें।
पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के तहत पशुपालन विभाग द्वारा जनपद में सुदृढ़ चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। योजना के पशुओं को पीपीआर, खुरपका-मुंहपका और ईटी जैसे घातक रोगों से बचाने के लिए समयबद्ध टीकाकरण और नियमित       कृमिनाशक दवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही, आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए 1962 टोल-फ्री हेल्पलाइन और मोबाइल वेटरनरी सेवा के माध्यम से लाभार्थियों के द्वार पर त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
लाभार्थियों को वित्तीय और प्राकृतिक जोखिम से सुरक्षित रखने के लिए पशुधन बीमा की व्यवस्था को अनिवार्य घटक बनाया गया है। वितरित बकरियों और बकरों का निर्धारित अवधि के लिए व्यापक बीमा कराया जाता है, जिसका प्रीमियम स्वीकृत अनुदान राशि से ही वहन होता है। इससे किसी भी अप्रत्याशित बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में गरीब पशुपालक को पूंजीगत नुकसान नहीं होता और उनका आजीविका साधन निरंतर सुरक्षित रहता है।
ग्रामीण परिवेश में बकरी पालन को उच्च लाभ और न्यूनतम जोखिम वाला उद्यम माना जाता है। बकरियों की तीव्र प्रजनन क्षमता और स्थानीय बाजारों में दूध, मांस व जैविक खाद की निरंतर मांग के चलते यह व्यवसाय वर्ष भर आय प्रदान करता है। कुछ ही समय में पशुओं की संख्या बढ़ने से यह लघु इकाई एक आत्मनिर्भर व्यावसायिक मॉडल में बदल जाती है, जिससे लाभार्थी परिवारों का आर्थिक स्तर तेजी से सुधरता है।
योजना की वित्तीय और प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए जनपद अलीगढ़ से चयनित सभी लाभार्थियों की सूची विभागीय ई-मेल प्रणाली के माध्यम से सीधे निदेशालय को प्रेषित की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवंटित धनराशि का व्यय निर्धारित समयसीमा के भीतर शत-प्रतिशत वित्तीय नियमों के अनुसार हो, ताकि योजना का लाभ लक्षित समुदाय को समय पर मिल सके।
प्रदेश सरकार की यह कल्याणकारी पहल जनपद अलीगढ़ के अनुसूचित जाति परिवारों को आत्मनिर्भरता की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। पशुपालन आधारित स्वरोजगार से जुड़कर ग्रामीण परिवार न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। यह योजना समावेशी ग्रामीण विकास के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है।

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