धम्म दीक्षा समारोह में पुस्तक ‘बहुजन गीतमाला’ एवं समाचार पत्र ‘बोधिसत्व बाबा साहब टुडे’ का हुआ विमोचन,

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दिनांक: 16 अक्टूबर 2026 स्थान: लखनऊ: भारतीय बौद्ध समिति एवं बौद्ध अंबेडकर सामाजिक संयुक्त समितियों के तत्वाधान में परिवर्तन चौक स्थित बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर 71वाँ धम्म दीक्षा समारोह अत्यंत हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया।

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इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों द्वारा साहित्य एवं पत्रकारिता से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

पुस्तक व समाचार पत्र का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मंच एवं प्रेस गैलरी में संयुक्त रूप से विमोचन संपन्न हुआ:

  • ‘बहुजन गीतमाला’ (प्रथम संस्करण): मलिहाबाद (लखनऊ) के ग्राम महमूद नगर की निवासी लेखिका प्रिंग कोम्यो निरिस्सरा द्वारा अपने माता-पिता को समर्पित पुस्तक का विमोचन किया गया।
  • ‘बोधिसत्व बाबा साहब टुडे’: संपादक ज्ञान प्रकाश जख्मी के हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर पूर्व उप निदेशक (सूचना) प्रमोद कुमार, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता (जल निगम) ई. भीमराज, तथा समाजसेवी एवं संपादक ज्ञान प्रकाश जख्मी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

पुस्तकों और समाचार पत्रों के महत्व पर विचार: वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों और समाचार पत्रों की उपादेयता भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में बनी रहेगी। वर्तमान डिजिटल युग में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग के कारण पठन-पाठन की संस्कृति में कमी आ रही है, जो समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए ठीक नहीं है। मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल न केवल स्वाध्याय को प्रभावित कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

धम्म चक्र प्रवर्तन: शांति, समता और बंधुत्व का संदेश

  • पूर्व उप निदेशक सूचना प्रमोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि धम्म चक्र प्रवर्तन का वास्तविक अर्थ समता, करुणा, न्याय और विश्व बंधुत्व के विचार को निरंतर आगे बढ़ाना है।
  • पूर्व आईपीएस डॉ. बी. पी. अशोक एवं संपादक ज्ञान प्रकाश जख्मी ने धम्म दीक्षा दिवस (धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस) के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला:
    • 14 अक्टूबर 1956: नागपुर की ऐतिहासिक दीक्षाभूमि पर संविधान शिल्पी बाबा साहब डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने 5 लाख से अधिक अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया था।
    • सम्राट अशोक का संबंध: यह तिथि अशोक विजयादशमी का दिन थी, जब ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का त्याग कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी।

वक्ताओं ने बल दिया कि यह दिन राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक सौहार्द और सकारात्मक कार्यों के माध्यम से देश को उन्नति की ओर ले जाने का संकल्प लेने का अवसर है।

डॉ. गया प्रसाद प्रशांत को मरणोपरांत ‘बौद्ध रत्न’ सम्मान

बौद्ध धर्म के प्रसार एवं सामाजिक क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए डॉ. गया प्रसाद प्रशांत को मरणोपरांत ‘बौद्ध रत्न सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

यह सम्मान उनके छोटे पुत्र एडवोकेट विजय सेन, पुत्रवधू शशि भारती तथा पौत्र त्रिरत्न सेन ने ग्रहण किया और डॉ. प्रशांत के सामाजिक योगदान का विस्तार से स्मरण किया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख जन

समारोह में समाज के अनेक गणमान्य लोग, समाज सुधारक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से:

  • समाजसेवी रमेश पटेल
  • उपनिसा निरिस्सरा, शिप्रा, पारुल, सांग्मोझनिका, कमल रावत, काजल
  • पन्नालाल एवं संविधान प्रचारक राम लोट बौद्ध
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