
जर्जर इमारत बंद होने पर शुरू हुआ विवाद, मुस्लिम छात्रों ने बाहर नमाज पढ़ी, हिंदू संगठनों ने विरोध में चालीसा का पाठ किया; प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की
लखनऊ, 24 फरवरी 2026: लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत को जर्जर हालत के कारण बंद किए जाने के विरोध में तीसरे दिन भी तनाव जारी रहा। मुस्लिम छात्रों द्वारा बाहर नमाज अदा करने और हिंदू संगठनों द्वारा हनुमान चालीसा पाठ के दौरान हल्की झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया। प्रशासन ने दोनों पक्षों के कुल 13 छात्रों को नोटिस जारी कर ₹50,000 का व्यक्तिगत मुचलका तथा दो-दो जमानतदारों (प्रत्येक ₹50,000) से शांति बनाए रखने का आदेश दिया है।

विवाद की शुरुआत
22 फरवरी को विश्वविद्यालय प्रशासन ने 200 वर्ष पुरानी मुगलकालीन लाल बारादरी (ASI संरक्षित) की जर्जर हालत और सुरक्षा जोखिम (हाल ही में दीवार गिरने की घटना) का हवाला देकर मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग लगा दी। इमारत में स्थित छोटी मस्जिद में मुस्लिम छात्र रमजान के दौरान नमाज पढ़ते आए थे। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल मरम्मत और सुरक्षा के लिए है, न कि धार्मिक आधार पर।

प्रतिवाद और सद्भाव की मिसाल
बंद होने पर मुस्लिम छात्रों ने इमारत के बाहर नमाज अदा की। NSUI, समाजवादी छात्र सभा आदि संगठनों के हिंदू छात्रों ने उनकी सुरक्षा के लिए ह्यूमन चेन बनाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल होकर ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की मिसाल बनी। पुलिस ने इसे शांति भंग की आशंका मानकर मामला दर्ज किया।

विवाद का बढ़ना
24 फरवरी को स्थिति और भड़की। ABVP, बजरंग दल आदि संगठनों के छात्र लाल बारादरी के समीप पहुंचे और नमाज के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ किया, गंगाजल छिड़का तथा ‘शुद्धिकरण’ की मांग की। जय श्री राम के नारे लगे, जिससे हल्की धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर कई छात्रों को हिरासत में लिया और भीड़ को तितर-बितर किया। टैगोर लाइब्रेरी पार्क क्षेत्र में भी हंगामा हुआ।
प्रशासन की कार्रवाई
लखनऊ कमिश्नरेट के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने हसनगंज थाने की चालान रिपोर्ट के आधार पर 13 छात्रों (नमाज पढ़ने वाले और विरोध करने वाले दोनों) को नोटिस जारी किया। आरोप हैं—निर्माण कार्य में बाधा, नारेबाजी, सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधि से शांति भंग की आशंका। छात्रों को एक साल तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बॉन्ड ₹50,000 तथा दो जमानतदार (प्रत्येक ₹50,000) जमा करने होंगे। अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी।
कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है और बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।

छात्र संगठनों के बयान
NSUI और समाजवादी छात्र सभा ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण बताया तथा इमारत खोलने की मांग की। वहीं ABVP ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र है, धार्मिक स्थल नहीं—धार्मिक गतिविधियों के लिए बाहर जाएं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस और सपा से जुड़े नेताओं ने सरकार पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि मरम्मत कार्य पूरा होने तक प्रतिबंध जारी रहेगा। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बरकरार है। आगे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।











